बिरसा हरित ग्राम योजना झारखंड के ग्रामीण लोगों को झारखंड के किसानों को मिलेगा रोजगार का मौका | झारखंड के वादे की गारंटी देने के लिए करार जा रहा है बिरसा हरित ग्राम योजना, अनुमान जाने फलदार पोधे

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इस योजना के तहत एक इकाई में 100 दूतावास होंगे। इसमें 24 आम्रसूत्र, 24 अमरूद, 22 इमारतों, 25 लाख और पांच सूक्ष्मसूत्रों के माने जाएंगे। इससे हरित होगी साथ ही पर्यावरण को लाभ होगा और राज्यों के लिए आय का स्रोत विकसित होगा।

झारखंड के वादे की गारंटी देने के लिए करार जा रहा है बिरसा हरित ग्राम योजना, अनुमान जाने फलदार पोधे

झारखंड के छोटे किसानों को मिलेगा बिरसा किसान योजना का लाभ

छवि क्रेडिट स्रोत: प्रतीकात्मक छवि, TV9 डिजिटल

झारखंड के किसान की आय को बढ़ाने के लिए झारखंड सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसे लेकर कई तरह की योजना भी सचेत की जा रही है। इससे राज्य के किसानों को काफी फायदा मिल रहा है। इसी प्रकार की एक योजना है बिरसा हरित ग्राम योजना। योजना के तहत अब तक राज्य में 78 हजार एकड़ जमीन पर 76 लाख उद्यम लगे हैं। हर एक में रहने वाले पूरे के लिए उपक्रम का स्थायी स्रोत विकसित करना इस योजना का उद्देश्य है। इसके अलावा योजना के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के रूप और ऊपरी जमीन के प्रबंधन का लक्ष्य रखा गया है।

बिरसा हरित ग्राम योजना के माध्यम से झारखंड के बेरोजगारों को रोजगार के रूप में प्राप्त होगा इससे परिदृश्य में कमी आएगी। इसके माध्यम से फलदाव के लक्षण की तरह होंगे। गरीबों की रैयत जमीन पर ब्लॉक सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए आम की सबसे अच्छी प्रजातियों के रूप में जा रहे हैं। इसलिए की नहीं योजना के तहत आम के साथ-साथ नींबू, अमरूद, आदि मिश्रित मिश्रित की जा रही है।

बंजर जमीन पर होगी फलदार रूपरेखा की खेती

गांव में कलस्टर का निर्माण कर इस योजना की कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा इस योजना के माध्यम से बंजर और गैर मंजरिया खाली जमीन का भी उपयोग करेंगे। वे जमीन पर आम सहित अन्य फलदार संयंत्रों को स्थिर करेंगे। इससे हरित होगी साथ ही पर्यावरण को लाभ होगा और राज्यों के लिए आय का स्रोत विकसित होगा। इन मूलभूत अधिकारों से गांवों की दयनीय दृष्टी और जनजातियों को सब कुछ दिया जाएगा। जिससे वो अपने लिए रोजगार कमाएँ।

एक यूनिट के अनुरूप 100 सूजिओस

इस योजना के तहत एक इकाई में 100 दूतावास होंगे। इसमें 24 आम्रसूत्र, 24 अमरूद, 22 इमारतों, 25 लाख और पांच सूक्ष्मसूत्रों के माने जाएंगे। इसके अलावा राज्य के जिन प्रखंडों में तसर की खेती की जाती है, उन प्रखंडों में लाभुक की निजी जमीन पर अशोक और नैनो के तसर की खेती की जाती है। इसके अलावा जहां पर लाह की खेती की जाती है वहां उन क्षेत्रों में किसानों की जमीन पर सेमियातालता के प्रतिनिधि होंगे। योजना के फलदार संयंत्र लगाने से लाभ यह होगा की ग्रामीण आम और अमरूद का सेवन पर्याप्त मात्रा में कर ओपोन से बेरोजगारी से लड़ने में सफल होंगे।

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कौन कौन होंगे इस योजना का लाभुक

जो परिवार करार के लिए पूरी तरह से खेती पर कायम हैं और मनरेगा का रोजगार कार्ड है वैसे परिवार इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इसके साथ ही ग्रामीण जाति-जनजाति, आदिम जनजाति, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार, जिन संपूर्ण की मुखिय महिला है वैसे परिवार, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी, वन पट्टा धारक, लघु किसान, सीमांत और कम ज़मीन पर खेती करने वाले किसान इस योजना का लाभ लेने के हकदार होंगे।

Updated: 09/12/2022 — 13:24
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