पाकिस्तान म्यांमार और बांग्लादेश के अप्रवासियों को सरकार की नौकरी मिल जाएगी – पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यामांर से आये शरणार्थियों को यूपी में सरकार मिलेगी


– योगी आदित्यनाथ सरकार का फैसला
– दूसरे राज्यों के युवक नहीं कर सकते आवेदन
– सिंचाई विभाग ने तैयार किया है सरकरी नौकरी का प्रस्ताव

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार एक ओर जहां रोहिंग्याओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है, वहीं, पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यामांर से आये प्रवासी शरणार्थियों को सरकारी नौकरी (सरकार नाइकरी) देने की तैयारी में है। शासन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए सरकारी नियमों में बदलाव करने जा रहा है। सम्बंधित प्रस्ताव जल्द ही काउंटर में रखा जाएगा। सरकार के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है, जिसमें प्रवासी शरणार्थियों के लिए जरूरी तैयार की गई हैं। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) आने के बाद यूपी का सिंचाई विभाग पहला विभाग होगा जिसमें प्रवासी शरणार्थियों को सरकारी नौकरी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग में जल्द ही सींचपाल, सींच पर्यवेक्षक और जिलेदार के सैकड़ों पद भरे जा रहे हैं।

इन पदों के लिए पाकिस्तान, बर्मा, बांग्लादेश के अलावा श्रीलंका, पूर्वी अफ्रीका के केन्या, युगांडा और तंजानिया जैसे अन्य दूसरे देशों से आने वाले भारतीय मूल के नागरिकों को भी भर्ती का मौका दिया जाएगा। उनके अलावा सिंचाई विभाग में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन के इच्छुक उम्मीदवारों को उत्तर प्रदेश का स्थाई निवासी होना अनिवार्य होगा। अभी तक इन पदों के लिए किसी भी राज्य का निवासी आवेदन कर सकता था। इसके लिए वे नागरिक भी आवेदन कर सकते हैं, जो भारत में स्थाई रूप से निवास करने के इरादे से आए हैं। केंद्र सरकार की नौकरियों में तैनात लोगों के बच्चे भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वह तीन साल से यूपी में रह रहे हैं।

यह भी पढ़ें: यूपी में 51 लाख बुजुर्गों को हर महीने मिल रहे हैं 500 रुपये, घर बैठे बनवाएं बनवाएं और पेंशन पेंशन

पत्रिका पोल: 67 प्रति व्यक्ति निर्णय से असहमत
योगी आदित्यनाथ सरकार के इस फैसले पर पत्रिका उत्तर प्रदेश की टीम ने लोगों की राय जानने के लिए फेसबुक पेज पर एक पोल खोल दिया। 33 प्रति फेसबुक यूजर्स ने इस फैसले को उचित बताया जबकि 67 प्रति लोग सरकार के इस फैसले से सहमत नहीं हैं। कई लोगों ने कमेंट कर अपनी राय भी दी है। वहीं, पत्रिका उत्तर प्रदेश के ट्विटर पोल पर करीब 57 फीसदी लोगों ने सरकार के फैसले को अनुचित बताया है।

यह भी पढ़ें: शिक्षामित्रों और प्रशिक्षकों के मानदेय पर बड़ा फैसला, महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने जारी किया आदेश