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बिहार में शीतकालीन सत्र में रोजगार और भ्रष्टाचार का मुद्दा हावी रहेगा बिहार: शीतकालीन सत्र में रोजगार-भ्रष्टाचार का मुद्दा हावी रहेगा, दोनों पक्षों ने केसी कमर की


पटना: सोमवार से विधानमंडल का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। सत्र काफी छोटा है इसलिए हंगामें की गुंजाइश काफी कम है, लेकिन विपक्ष ने इस छोटे सत्र में भी एनडीए की सरकार को रोजगार और भ्रष्टाचार के मसले पर घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। वहीं बीजेपी ज़ीयू ने भी तेजस्वी को उन्हीं के मुद्दों पर जवाब देने का मन बना लिया है।

सोमवार से विधानमंडल का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। 27 तारीख तक चलने वाला सत्र काफी छोटा है, लेकिन सत्र के हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं। शुरुआत के दो दिनों तक सदन में नए विधायकों का शपथ ग्रहण होगा।

25 तारीख को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होना है, लेकिन इसबार विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी एनडीए के लिए आसान नहीं रहनेवाला है। क्योंकि महागठबंधन इसबार मजबूत विपक्ष के तौर पर सदन में होगा। चर्चा है कि महागठबंधन की ओर से किसी उम्मीदवार को विधानसभा अध्यक्ष चुनाव के लिए उम्मीदवार के रूप में उतार दिया जाना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो एनडीए के लिए अध्यक्ष पद की कुर्सी हासिल करनी आसान नहीं रहेगी।

अध्यक्ष पद के चुनाव के बाद के दो दिनों में राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में चर्चा होगी। इस चर्चा के दौरान ही विपक्ष सरकार पर हावी होने की कोशिश करेगा। आरजेडी नेता शक्ति यादव कहते हैं कि सदन में सरकार को जवाब देना होगा। 19 लाख नौकरी भ्रष्ट किसानों से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष के सवालों का जवाब तो देंगे ही।

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कहा है कि विपक्ष के पास मुद्दों की कमी नहीं है। हम सरकार को घेरेंगे नहीं बल्कि सरकार को जगाएंगे। 19 लाख की नौकरी कब और कैसे दी जाएगी ये जानकारी मांगेंगे शिक्षकों को समान काम समान वेतन कब से मिलेगा। तमाम मुद्दों पर सरकार को जवाब देना होगा।

वही, ज़ीयू एमएलसी गुलाम गौस ने मामला पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। गौस ने कहा कि विपक्ष सरकार का एकमात्र हिस्सा है। विपक्ष को सकारात्मक रूख रखना चाहिए। बेवजह हल्ला हमामा ठीक नहीं है। तेजस्वी यादवंत के खिलाफ सिर्फ आरोप लगा रहे हैं। उनके पास सबूत नहीं हैं।

बीजेपी प्रवक्ता प्रेमरंजन पटेल ने तो विपक्ष को विपक्ष की ही भाषा में जवाब देने की बात कही है। प्रेमरंजन पटेल ने कहा है कि सदन में तेजश्वी यादव को जवाब देना होगा। भ्रष्टाचार के इतने आरोपों के बाद उन्हें नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी क्यों दी गई। उनपर बहुत गंभीर मामला दर्ज कैसे हुआ। तेजस्वी यादव सत्तापक्ष के सवालों से बच नहीं पाएंगे।

कुल मिलाकर ये माना जा रहा था कि सत्र छोटे होने और नए विधायकों के सदन में आने के कारण मामले के तरीके से निपटेंगे, लेकिन हाल ही में कम मतों से मिली हार, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मंत्री मेवालाल का इस्तीफा, नौकरी के लिए सरकार पर दवाब बनाने जैसे मुद्दों के बल पर मजबूत विपक्ष शीतकालीन सत्र को गर्म बनाने की तैयारी कर चुका है।



Updated: 22/11/2020 — 22:23

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